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"text": "PIB Backgrounder पीएम-किसान की 23वीं किस्त 9.44 करोड़ किसानों को प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण के माध्यम से ₹18,880 करोड़ हस्तांतरित किए गए प्रविष्टि तिथि:\n 20 JUN 2026 6:35PM by PIB Delhi प्रधानमंत्री जी ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि ( पीएम - किसान ) योजना की 23 वीं किस्त में ₹18,880 करोड़ से अधिक की राशि जारी की। धनराशि जारी करने की घोषणा 20 जून , 2026 को पश्चिम बंगाल के हुगली में की गई। इस किस्त के अंतर्गत 9.44 करोड़ से अधिक किसानों को वित्तीय मदद प्राप्त हुई। इनमें से 2.18 करोड़ महिला किसान हैं। 1 करोड़ से अधिक किसानों ने इस कार्यक्रम में ऑनलाइन माध्यम से हिस्सा लिया। 2019 में योजना के शुभारंभ के बाद से अब तक ₹4.46 लाख करोड़ से अधिक की राशि वितरित की जा चुकी है। इससे पीएम - किसान विश्व की सबसे बड़ी डीबीटी पहलों में एक बन गई है। इस दिन को \" पीएम किसान उत्सव दिवस \" ​​ के तौर पर भी मनाया गया। पीएम - किसान : किसानों के लिए आय का सशक्तिकरण प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि ( पीएम - किसान ) की 23 वीं किस्त 20 जून , 2026 को पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के ताड़केश्वर में वितरित की गई। लगभग 9.44 करोड़ पात्र किसानों , जिनमें 2.18 करोड़ से अधिक महिलाएं भी शामिल हैं , को प्रत्यक्ष वित्तीय मदद के तौर पर लगभग ₹18,880 करोड़ प्राप्त हुए। यह धनराशि प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण ( डीबीटी ) प्रणाली के माध्यम से हस्तांतरित की गई , जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित हुई और बिचौलिए खत्म हुए। इस योजना को ' अन्नदाता सम्मान ' सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जाता है। पश्चिम बंगाल में किसानों के सशक्तिकरण के लिए नई कृषि पहल पश्चिम बंगाल में प्रधानमंत्री - किसान योजना की 23 वीं किस्त के साथ - साथ सरकार ने कई प्रमुख कृषि पहलों की शुरुआत की है : प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना ( पीएमएफबीवाई ) और पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना ( आरडब्ल्यूबीसीआईएस ) के अंतर्गत प्राकृतिक आपदाओं , कीटों और प्रतिकूल मौसम की स्थितियों में फसलों को बीमा कवरेज प्रदान किया जाएगा। इन योजनाओं का उद्देश्य 30 लाख हेक्टेयर में फैले 1.10 करोड़ किसानों को ₹ 28,140 करोड़ के बीमित मूल्य के साथ कवर करना है। डिजिटल कृषि मिशन के अंतर्गत , एग्रीस्टैक पश्चिम बंगाल में क्रेडिट , बीमा , डीबीटी और खरीद सेवाओं तक निर्बाध पहुंच सुनिश्चित करेगा। राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन क्लस्टर आधारित पहलों और किसान प्रशिक्षण के माध्यम से संपोषित , रसायन - मुक्त कृषि को प्रोत्साहन देगा। 346 प्राकृतिक कृषि क्लस्टर 17,300 हेक्टेयर क्षेत्र को कवर करेंगे और 43,250 किसानों को लाभ पहुंचाएंगे। पश्चिम बंगाल के चार जिलों में प्रधानमंत्री धन - धान्य कृषि योजना शुरू की गई। इस योजना से उत्पादकता में सुधार होगा , विविधीकरण को बढ़ावा मिलेगा , इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती मिलेगी और सिंचाई एवं संस्थागत क्रेडिट तक पहुंच बढ़ेगी। पीएम - किसान योजना के अंतर्गत लघु एवं सीमांत किसानों को प्रत्यक्ष आय मदद पीएम - किसान केंद्र प्रायोजित योजना है , जिसे 24 फरवरी , 2019 को शुरू किया गया था। इस योजना का उद्देश्य देशभर में कृषि योग्य भूमि वाले भूमिधारक किसान परिवारों को सुनिश्चित आय की सहायता प्रदान करना है। इस योजना के अंतर्गत , प्रत्येक पात्र किसान परिवार को प्रति वर्ष ₹6,000 की वित्तीय मदद प्राप्त होती है। यह राशि ₹2,000 की तीन समान किस्तों में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण ( डीबीटी ) के माध्यम से आधार से जुड़े बैंक खातों में वितरित की जाती है। अब तक , देश भर में पात्र किसान परिवारों को 23 किस्तों में ₹4.46 लाख करोड़ से अधिक की राशि वितरित की जा चुकी है। इस योजना का लाभ किसानों को पीएम - किसान पोर्टल पर भूमि रिकॉर्ड दर्ज करने पर मिलता है। इसके साथ ही , उन्हें अपने बैंक खातों को आधार कार्ड से लिंक करना और ई - केवाईसी सत्यापन पूरा करना जरूरी है। किसानों की आय सुरक्षा को मजबूत करने के प्रति सरकार की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाते हुए , केंद्रीय बजट 2026-27 में पीएम - किसान योजना के लिए ₹60,000 करोड़ आवंटित किए गए हैं। इस योजना का उद्देश्य कृषि संबंधी इनपुट के लिए वित्तीय मदद प्रदान करके छोटे और सीमांत किसानों की आय बढ़ाना है। इससे फसलों की सेहत और उत्पादकता में सुधार होता है। प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता प्रदान करने से किसानों की अनौपचारिक क्रेडिट स्रोतों पर निर्भरता कम होती है और कृषि गतिविधियों की निरंतरता सुनिश्चित होती है। पीएम - किसान विश्व स्तर पर सबसे बड़ी प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण ( डीबीटी ) पहलों में से एक है। यह किसानों को सीधे वित्तीय मदद पहुंचाने के लिए इसके महत्वपूर्ण संस्थागत तंत्र को रेखांकित करता है। लाभार्थियों में 23 प्रतिशत से अधिक महिलाएं हैं , जो इस योजना की व्यापक पहुंच को दर्शाती है। विषय का अध्ययन : उत्तर प्रदेश में पीएम - किसान योजना का कृषि आय पर असर इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कृषि - आर्थिक अनुसंधान केंद्र ने कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के प्रायोजन से 2022 में एक अध्ययन किया। यह अध्ययन उत्तर प्रदेश में पीएम - किसान योजना के प्रभाव पर केंद्रित था। अध्ययन के मुख्य निष्कर्ष निम्नलिखित हैं : अधिकांश लाभार्थी दो हेक्टेयर से कम भूमि वाले छोटे और सीमांत किसान थे। लाभार्थी किसानों को पीएम - किसान योजना के अंतर्गत नियमित तौर पर सालाना ₹6,000 प्राप्त हुए। कृषि का खर्च मुख्य रूप से जुताई , उर्वरकों और बीजों पर केंद्रित था। लाभार्थी खेतों में धान की उपज गैर - लाभार्थी खेतों की तुलना में 3.08% अधिक थी। लाभार्थी खेतों में गेहूं की उपज गैर - लाभार्थी खेतों की तुलना में 1.93% अधिक थी। लाभार्थी परिवारों की शुद्ध कृषि आय गैर - लाभार्थी परिवारों की तुलना में अधिक थी। यह परिवारों की कृषि आय में 9.85% की बढ़ोतरी दर्शाती है। पीएम - किसान योजना ने किसानों की पैसे की लिक्विडिटी में सुधार किया और कृषि इनपुट की खरीद में मदद प्रदान की। इससे किसानों की जोखिम लेने की क्षमता बढ़ी और कृषि उत्पादन को सहयोग मिला। पीएम - किसान निधि हस्तांतरण की यात्रा यह प्रक्रिया पीएम - किसान पोर्टल , मोबाइल ऐप या सामान्य सेवा केंद्र ( सीएससी ) के माध्यम से किसानों के पंजीकरण से शुरू होती है। राज्य सरकारें पात्रता की जांच करती हैं और लाभार्थियों का विवरण पोर्टल पर अपलोड करती हैं। सिस्टम आधार कार्ड और बैंक खाता विवरण की पुष्टि करता है और अपात्र आवेदकों को अलग करता है। राज्य सरकार की ओर से अंतिम स्वीकृति के बाद , खाता सत्यापन के लिए डेटा को सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली ( पीएफएमएस ) में भेजा जाता है। पात्र रिकॉर्ड का उपयोग निधि हस्तांतरण अनुरोध और भुगतान आदेश जारी करने के लिए किया जाता है। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग स्वीकृति आदेश जारी करता है। इसके बाद प्रायोजक बैंकों और भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम ( एनपीसीआई ) के माध्यम से भुगतान की प्रक्रिया की जाती है। अंत में , धनराशि सीधे किसानों के बैंक खातों में जमा की जाती है , जिससे लाभों का त्वरित , पारदर्शी और कुशल वितरण सुनिश्चित होता है। लक्ष्य निर्धारण , लाभार्थी पहचान और डेटाबेस प्रबंधन राज्य सरकारों की यह जिम्मेदारी है कि वे पात्र किसान परिवारों की पहचान करें और लाभार्थियों का एक व्यापक डेटाबेस तैयार करें। इस डेटाबेस में नाम , आयु , श्रेणी , आधार संख्या , बैंक खाता जानकारी और मोबाइल नंबर जैसी महत्वपूर्ण जानकारी शामिल होती है। राज्य सरकारें यह सुनिश्चित करती हैं कि ये रिकॉर्ड सटीक हों , जिससे एकमुश्त भुगतान न हो। इन रिकॉर्डों को नियमित रूप से अपडेट किया जाता है , डिजिटाइज किया जाता है और आधार और बैंक खाता जानकारी से जोड़ा जाता है , जिससे लाभों का निर्बाध रूप से वितरण हो सके। पारदर्शिता को प्रोत्साहन देने के लिए पात्र लाभार्थियों की सूचियां ग्राम स्तर पर सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की जाती हैं। इससे अनजाने में छूट गए किसानों को उचित शिकायत निवारण तंत्र के माध्यम से अपना नाम दर्ज कराने का मौका भी मिलता है। इसके साथ ही , राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अपात्र लोगों को वितरित लाभों की वसूली के लिए कार्रवाई करते हैं। इनमें आयकरदाता , सरकारी कर्मचारी , सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों ( पीएसयू ) के कर्मचारी और संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्ति शामिल हैं। दिसंबर 2025 तक , देशभर में अपात्र लाभार्थियों से कुल ₹416.75 करोड़ की राशि वसूल की जा चुकी है। पीएम - किसान योजना के तहत पहुंच और समावेशन का सशक्तिकरण सरकार ने पात्र किसानों को पीएम - किसान योजनाओं का लाभ आसानी से उपलब्ध कराने के लिए कई पहल की हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य डिजिटल और जमीनी स्तर पर हस्तक्षेप के माध्यम से पंजीकरण , सत्यापन और शिकायत निवारण में सुधार करना है। किसान पंजीकरण और ई - केवाईसी प्रक्रिया को पूरा करने में सहायता के लिए 5 लाख से अधिक सामान्य सेवा केंद्र स्थापित किए गए हैं। विशेष परिपूर्णता अभियान चलाकर भी योजना का दायरा बढ़ाया गया है। विकसित भारत संकल्प यात्रा के दौरान पीएम - किसान योजना के अंतर्गत 1 करोड़ से अधिक पात्र किसानों को जोड़ा गया। सरकार की 100- दिवसीय पहल के अंतर्गत 25 लाख से अधिक किसानों को जोड़ा गया। सितंबर 2024 में चलाए गए एक विशेष अभियान के माध्यम से लंबित स्व - पंजीकरण मामलों का निपटारा करके 30 लाख से अधिक किसानों को योजना में शामिल किया गया। बहुस्तरीय निगरानी और शिकायत निवारण फ्रेमवर्क प्रधानमंत्री - किसान योजना की निगरानी राष्ट्रीय , राज्य और जिला स्तर पर संचालित बहुस्तरीय संस्थागत ढांचे के माध्यम से की जाती है। राष्ट्रीय स्तर पर समीक्षा तंत्र की अध्यक्षता मंत्रिमंडल सचिव करते हैं। राज्य और जिला निगरानी समितियां अपने - अपने अधिकार क्षेत्र में कार्यान्वयन की निगरानी करती हैं। किसान पीएम - किसान पोर्टल और केंद्रीकृत सार्वजनिक शिकायत निवारण और मॉनीटरिंग प्रणाली ( सीपीजीआरएएमएस ) के माध्यम से अपनी शिकायतें दर्ज करा सकते हैं। इससे शिकायतों का समय पर समाधान और पारदर्शी शिकायत प्रबंधन सुनिश्चित होता है। वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान पीएम - किसान पोर्टल पर कुल 24,605 ​​ शिकायतें दर्ज की गईं। पीएम - किसान के अंतर्गत प्रौद्योगिकी - आधारित सेवा वितरण प्रणाली पीएम - किसान योजना किसान - केंद्रित डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से सहयोग की गई है , जो लाभों के वितरण में सुगम पहुंच और पारदर्शिता को बढ़ाती है। आधार - आधारित प्रमाणीकरण प्रणाली का एक प्रमुख स्तंभ है , जो लाभार्थियों की सुरक्षित पहचान और भुगतान सत्यापन को आसान बनाता है। किसान निम्न तरीकों से ई - केवाईसी पूरा कर सकते हैं : ओटीपी - आधारित प्रमाणीकरण बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण चेहरे का प्रमाणीकरण पीएम - किसान वेब पोर्टल लाभार्थी पंजीकरण , सत्यापन और डेटा प्रबंधन के लिए केंद्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म के तौर पर कार्य करता है। यह किसानों का एक एकीकृत राष्ट्रीय डेटाबेस रखता है और सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली ( पीएफएमएस ) के साथ एकीकरण के माध्यम से निधि हस्तांतरण को आसान बनाता है। यह देश भर में वित्तीय लेन - देन की त्वरित समय पर निगरानी भी सक्षम बनाता है। पोर्टल लाभार्थी किसानों की स्थानवार सूचियां भी प्रदान करता है , जिससे कार्यक्रम कार्यान्वयन में पारदर्शिता बढ़ती है। पोर्टल के पूरक के रूप में , 2020 में लॉन्च किया गया पीएम - किसान मोबाइल एप्लिकेशन , मोबाइल यूजर्स को भी ये सेवाएं प्रदान करता है। यह एप्लिकेशन किसानों को स्व - पंजीकरण करने , लाभ हस्तांतरण की स्थिति का पता लगाने और ई - केवाईसी सत्यापन पूरा करने में सक्षम बनाता है। 2023 में , एप्लिकेशन को चेहरे से प्रमाणीकरण की सुविधा के साथ अपग्रेड किया गया। इससे किसान अपने चेहरे को स्कैन करके ई - केवाईसी पूरा कर सकते हैं , जिससे ओटीपी या फिंगरप्रिंट आधारित सत्यापन की जरूरत खत्म हो जाती है। इस प्रकार , यह उपाय इस योजना की सुलभता बढ़ाने में महत्वपूर्ण सिद्ध हुआ है। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस ( एआई ) सहायता प्रणाली : किसान - ईमित्र सितंबर 2023 में , सरकार ने किसान - ई - मित्र की शुरुआत की , जो पीएम - किसान डिजिटल इकोसिस्टम से जुड़ा एक एआई - योग्य चैटबॉट है। इसे एकस्टेप फाउंडेशन और भाषिणी के तकनीकी सहयोग से तैयार किया गया था। यह चैटबॉट किसानों को कई भारतीय भाषाओं में योजना के अंतर्गत भुगतान , पंजीकरण और पात्रता संबंधी की जानकारी त्वरित समय पर प्रदान करता है। यह मंच 11 प्रमुख भाषाओं - हिंदी , अंग्रेजी , तमिल , बंगाली , ओडिया , मलयालम , गुजराती , पंजाबी , तेलुगु , मराठी और कन्नड़ - में 24/7 सहायता प्रदान करता है। इससे विविध यूजर्स समूह के लिए पहुंच आसान हो जाती है। आवाज और टेक्स्ट आधारित प्रश्नों के माध्यम से किसान अपने आवेदन की स्थिति की जांच कर सकते हैं , भुगतान संबंधी अपडेट ट्रैक कर सकते हैं और योजना से संबंधित जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। किसान - केंद्रित कृषि विकास का भविष्य प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि ( पीएम - किसान ) एक पारंपरिक आय सहायता कार्यक्रम से कहीं अधिक व्यापक है। यह किसान - केंद्रित और समावेशी कृषि विकास की दिशा में एक व्यापक नीतिगत दृष्टिकोण को दर्शाती है। यह पात्रता - आधारित सहायता से सशक्तिकरण - उन्मुख सहायता की ओर बदलाव को सक्षम बनाती है। इस प्रकार , यह योजना सार्वजनिक संस्थानों और किसान समुदाय के बीच संबंधों को पुनर्परिभाषित करने में सहायक है। पीएम - किसान योजना ने केवल आर्थिक सहायता ही नहीं दी है , बल्कि इससे किसानों को नए प्रयोग करने का आत्मविश्वास भी मिला है। इसमें बेहतर बीजों में निवेश करने से लेकर नई फसलें उगाने और कृषि पद्धतियों में सुधार करने तक कई चीजें शामिल हैं। भारत के कई गांवों में रहने वाले किसानों के लिए यह योजना जीवन में बदलाव लाने वाली साबित हुई है , जिसने न केवल मदद प्रदान की है , बल्कि भविष्य के लिए आशा और सुरक्षा की भावना भी जगाई है। संदर्भ कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय https://www.nic.gov.in/project/pm-kisan/ https://sansad.in/getFile/annex/270/AU3226_xbrVz9.pdf?source=pqars https://www.allduniv.ac.in/upload/file_collection/PM_Kisan_PDF_Final.pdf पीआईबी बैकग्राउंडर्स https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2242295&reg=48&lang=2 पीआईबी शोध Click here to see pdf *** पीके / केसी / एमएम (रिलीज़ आईडी: 2275820) आगंतुक पटल : 3891 इस विज्ञप्ति को इन भाषाओं में पढ़ें: English , Bengali , Bengali-TR , Gujarati PIB Backgrounder पीएम-किसान की 23वीं किस्त 9.44 करोड़ किसानों को प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण के माध्यम से ₹18,880 करोड़ हस्तांतरित किए गए प्रविष्टि तिथि:\n 20 JUN 2026 6:35PM by PIB Delhi प्रधानमंत्री जी ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि ( पीएम - किसान ) योजना की 23 वीं किस्त में ₹18,880 करोड़ से अधिक की राशि जारी की। धनराशि जारी करने की घोषणा 20 जून , 2026 को पश्चिम बंगाल के हुगली में की गई। इस किस्त के अंतर्गत 9.44 करोड़ से अधिक किसानों को वित्तीय मदद प्राप्त हुई। इनमें से 2.18 करोड़ महिला किसान हैं। 1 करोड़ से अधिक किसानों ने इस कार्यक्रम में ऑनलाइन माध्यम से हिस्सा लिया। 2019 में योजना के शुभारंभ के बाद से अब तक ₹4.46 लाख करोड़ से अधिक की राशि वितरित की जा चुकी है। इससे पीएम - किसान विश्व की सबसे बड़ी डीबीटी पहलों में एक बन गई है। इस दिन को \" पीएम किसान उत्सव दिवस \" ​​ के तौर पर भी मनाया गया। पीएम - किसान : किसानों के लिए आय का सशक्तिकरण प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि ( पीएम - किसान ) की 23 वीं किस्त 20 जून , 2026 को पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के ताड़केश्वर में वितरित की गई। लगभग 9.44 करोड़ पात्र किसानों , जिनमें 2.18 करोड़ से अधिक महिलाएं भी शामिल हैं , को प्रत्यक्ष वित्तीय मदद के तौर पर लगभग ₹18,880 करोड़ प्राप्त हुए। यह धनराशि प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण ( डीबीटी ) प्रणाली के माध्यम से हस्तांतरित की गई , जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित हुई और बिचौलिए खत्म हुए। इस योजना को ' अन्नदाता सम्मान ' सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जाता है। पश्चिम बंगाल में किसानों के सशक्तिकरण के लिए नई कृषि पहल पश्चिम बंगाल में प्रधानमंत्री - किसान योजना की 23 वीं किस्त के साथ - साथ सरकार ने कई प्रमुख कृषि पहलों की शुरुआत की है : प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना ( पीएमएफबीवाई ) और पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना ( आरडब्ल्यूबीसीआईएस ) के अंतर्गत प्राकृतिक आपदाओं , कीटों और प्रतिकूल मौसम की स्थितियों में फसलों को बीमा कवरेज प्रदान किया जाएगा। इन योजनाओं का उद्देश्य 30 लाख हेक्टेयर में फैले 1.10 करोड़ किसानों को ₹ 28,140 करोड़ के बीमित मूल्य के साथ कवर करना है। डिजिटल कृषि मिशन के अंतर्गत , एग्रीस्टैक पश्चिम बंगाल में क्रेडिट , बीमा , डीबीटी और खरीद सेवाओं तक निर्बाध पहुंच सुनिश्चित करेगा। राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन क्लस्टर आधारित पहलों और किसान प्रशिक्षण के माध्यम से संपोषित , रसायन - मुक्त कृषि को प्रोत्साहन देगा। 346 प्राकृतिक कृषि क्लस्टर 17,300 हेक्टेयर क्षेत्र को कवर करेंगे और 43,250 किसानों को लाभ पहुंचाएंगे। पश्चिम बंगाल के चार जिलों में प्रधानमंत्री धन - धान्य कृषि योजना शुरू की गई। इस योजना से उत्पादकता में सुधार होगा , विविधीकरण को बढ़ावा मिलेगा , इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती मिलेगी और सिंचाई एवं संस्थागत क्रेडिट तक पहुंच बढ़ेगी। पीएम - किसान योजना के अंतर्गत लघु एवं सीमांत किसानों को प्रत्यक्ष आय मदद पीएम - किसान केंद्र प्रायोजित योजना है , जिसे 24 फरवरी , 2019 को शुरू किया गया था। इस योजना का उद्देश्य देशभर में कृषि योग्य भूमि वाले भूमिधारक किसान परिवारों को सुनिश्चित आय की सहायता प्रदान करना है। इस योजना के अंतर्गत , प्रत्येक पात्र किसान परिवार को प्रति वर्ष ₹6,000 की वित्तीय मदद प्राप्त होती है। यह राशि ₹2,000 की तीन समान किस्तों में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण ( डीबीटी ) के माध्यम से आधार से जुड़े बैंक खातों में वितरित की जाती है। अब तक , देश भर में पात्र किसान परिवारों को 23 किस्तों में ₹4.46 लाख करोड़ से अधिक की राशि वितरित की जा चुकी है। इस योजना का लाभ किसानों को पीएम - किसान पोर्टल पर भूमि रिकॉर्ड दर्ज करने पर मिलता है। इसके साथ ही , उन्हें अपने बैंक खातों को आधार कार्ड से लिंक करना और ई - केवाईसी सत्यापन पूरा करना जरूरी है। किसानों की आय सुरक्षा को मजबूत करने के प्रति सरकार की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाते हुए , केंद्रीय बजट 2026-27 में पीएम - किसान योजना के लिए ₹60,000 करोड़ आवंटित किए गए हैं। इस योजना का उद्देश्य कृषि संबंधी इनपुट के लिए वित्तीय मदद प्रदान करके छोटे और सीमांत किसानों की आय बढ़ाना है। इससे फसलों की सेहत और उत्पादकता में सुधार होता है। प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता प्रदान करने से किसानों की अनौपचारिक क्रेडिट स्रोतों पर निर्भरता कम होती है और कृषि गतिविधियों की निरंतरता सुनिश्चित होती है। पीएम - 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किसान योजना के तहत पहुंच और समावेशन का सशक्तिकरण सरकार ने पात्र किसानों को पीएम - किसान योजनाओं का लाभ आसानी से उपलब्ध कराने के लिए कई पहल की हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य डिजिटल और जमीनी स्तर पर हस्तक्षेप के माध्यम से पंजीकरण , सत्यापन और शिकायत निवारण में सुधार करना है। किसान पंजीकरण और ई - केवाईसी प्रक्रिया को पूरा करने में सहायता के लिए 5 लाख से अधिक सामान्य सेवा केंद्र स्थापित किए गए हैं। विशेष परिपूर्णता अभियान चलाकर भी योजना का दायरा बढ़ाया गया है। विकसित भारत संकल्प यात्रा के दौरान पीएम - किसान योजना के अंतर्गत 1 करोड़ से अधिक पात्र किसानों को जोड़ा गया। सरकार की 100- दिवसीय पहल के अंतर्गत 25 लाख से अधिक किसानों को जोड़ा गया। सितंबर 2024 में चलाए गए एक विशेष अभियान के माध्यम से लंबित स्व - पंजीकरण मामलों का निपटारा करके 30 लाख से अधिक किसानों को योजना में शामिल किया गया। बहुस्तरीय निगरानी और शिकायत निवारण फ्रेमवर्क प्रधानमंत्री - किसान योजना की निगरानी राष्ट्रीय , राज्य और जिला स्तर पर संचालित बहुस्तरीय संस्थागत ढांचे के माध्यम से की जाती है। राष्ट्रीय स्तर पर समीक्षा तंत्र की अध्यक्षता मंत्रिमंडल सचिव करते हैं। राज्य और जिला निगरानी समितियां अपने - अपने अधिकार क्षेत्र में कार्यान्वयन की निगरानी करती हैं। किसान पीएम - किसान पोर्टल और केंद्रीकृत सार्वजनिक शिकायत निवारण और मॉनीटरिंग प्रणाली ( सीपीजीआरएएमएस ) के माध्यम से अपनी शिकायतें दर्ज करा सकते हैं। इससे शिकायतों का समय पर समाधान और पारदर्शी शिकायत प्रबंधन सुनिश्चित होता है। वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान पीएम - किसान पोर्टल पर कुल 24,605 ​​ शिकायतें दर्ज की गईं। पीएम - किसान के अंतर्गत प्रौद्योगिकी - आधारित सेवा वितरण प्रणाली पीएम - किसान योजना किसान - केंद्रित डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से सहयोग की गई है , जो लाभों के वितरण में सुगम पहुंच और पारदर्शिता को बढ़ाती है। आधार - आधारित प्रमाणीकरण प्रणाली का एक प्रमुख स्तंभ है , जो लाभार्थियों की सुरक्षित पहचान और भुगतान सत्यापन को आसान बनाता है। किसान निम्न तरीकों से ई - केवाईसी पूरा कर सकते हैं : ओटीपी - आधारित प्रमाणीकरण बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण चेहरे का प्रमाणीकरण पीएम - किसान वेब पोर्टल लाभार्थी पंजीकरण , सत्यापन और डेटा प्रबंधन के लिए केंद्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म के तौर पर कार्य करता है। यह किसानों का एक एकीकृत राष्ट्रीय डेटाबेस रखता है और सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली ( पीएफएमएस ) के साथ एकीकरण के माध्यम से निधि हस्तांतरण को आसान बनाता है। यह देश भर में वित्तीय लेन - देन की त्वरित समय पर निगरानी भी सक्षम बनाता है। पोर्टल लाभार्थी किसानों की स्थानवार सूचियां भी प्रदान करता है , जिससे कार्यक्रम कार्यान्वयन में पारदर्शिता बढ़ती है। पोर्टल के पूरक के रूप में , 2020 में लॉन्च किया गया पीएम - किसान मोबाइल एप्लिकेशन , मोबाइल यूजर्स को भी ये सेवाएं प्रदान करता है। यह एप्लिकेशन किसानों को स्व - पंजीकरण करने , लाभ हस्तांतरण की स्थिति का पता लगाने और ई - केवाईसी सत्यापन पूरा करने में सक्षम बनाता है। 2023 में , एप्लिकेशन को चेहरे से प्रमाणीकरण की सुविधा के साथ अपग्रेड किया गया। इससे किसान अपने चेहरे को स्कैन करके ई - केवाईसी पूरा कर सकते हैं , जिससे ओटीपी या फिंगरप्रिंट आधारित सत्यापन की जरूरत खत्म हो जाती है। इस प्रकार , यह उपाय इस योजना की सुलभता बढ़ाने में महत्वपूर्ण सिद्ध हुआ है। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस ( एआई ) सहायता प्रणाली : किसान - ईमित्र सितंबर 2023 में , सरकार ने किसान - ई - मित्र की शुरुआत की , जो पीएम - किसान डिजिटल इकोसिस्टम से जुड़ा एक एआई - योग्य चैटबॉट है। इसे एकस्टेप फाउंडेशन और भाषिणी के तकनीकी सहयोग से तैयार किया गया था। यह चैटबॉट किसानों को कई भारतीय भाषाओं में योजना के अंतर्गत भुगतान , पंजीकरण और पात्रता संबंधी की जानकारी त्वरित समय पर प्रदान करता है। यह मंच 11 प्रमुख भाषाओं - हिंदी , अंग्रेजी , तमिल , बंगाली , ओडिया , मलयालम , गुजराती , पंजाबी , तेलुगु , मराठी और कन्नड़ - में 24/7 सहायता प्रदान करता है। इससे विविध यूजर्स समूह के लिए पहुंच आसान हो जाती है। आवाज और टेक्स्ट आधारित प्रश्नों के माध्यम से किसान अपने आवेदन की स्थिति की जांच कर सकते हैं , भुगतान संबंधी अपडेट ट्रैक कर सकते हैं और योजना से संबंधित जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। किसान - केंद्रित कृषि विकास का भविष्य प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि ( पीएम - किसान ) एक पारंपरिक आय सहायता कार्यक्रम से कहीं अधिक व्यापक है। यह किसान - केंद्रित और समावेशी कृषि विकास की दिशा में एक व्यापक नीतिगत दृष्टिकोण को दर्शाती है। यह पात्रता - आधारित सहायता से सशक्तिकरण - उन्मुख सहायता की ओर बदलाव को सक्षम बनाती है। इस प्रकार , यह योजना सार्वजनिक संस्थानों और किसान समुदाय के बीच संबंधों को पुनर्परिभाषित करने में सहायक है। पीएम - किसान योजना ने केवल आर्थिक सहायता ही नहीं दी है , बल्कि इससे किसानों को नए प्रयोग करने का आत्मविश्वास भी मिला है। इसमें बेहतर बीजों में निवेश करने से लेकर नई फसलें उगाने और कृषि पद्धतियों में सुधार करने तक कई चीजें शामिल हैं। भारत के कई गांवों में रहने वाले किसानों के लिए यह योजना जीवन में बदलाव लाने वाली साबित हुई है , जिसने न केवल मदद प्रदान की है , बल्कि भविष्य के लिए आशा और सुरक्षा की भावना भी जगाई है। संदर्भ कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय https://www.nic.gov.in/project/pm-kisan/ https://sansad.in/getFile/annex/270/AU3226_xbrVz9.pdf?source=pqars https://www.allduniv.ac.in/upload/file_collection/PM_Kisan_PDF_Final.pdf पीआईबी बैकग्राउंडर्स https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2242295&reg=48&lang=2 पीआईबी शोध Click here to see pdf *** पीके / केसी / एमएम (रिलीज़ आईडी: 2275820)",
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"id": "wiki_भारतीय_रिज़र्व_बैंक",
"source": "wikipedia_hi",
"text": "भारतीय रिजर्व बैंक, अंग्रेज़ी: Reserve Bank of India, भारत का केन्द्रीय बैंक है। यह भारत के सभी बैंकों का संचालक है। रिज़र्व बैक भारत की अर्थव्यवस्था को नियन्त्रित करता है।",
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"id": "wiki_सेबी",
"source": "wikipedia_hi",
"text": "भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड - भारत में प्रतिभूति और वित्त का नियामक बोर्ड है। इसकी स्थापना 12 अप्रैल 1988 में हुई तथा सेबी अधिनियम 1992 के तहत वैधानिक मान्यता 30 जनवरी 1992 को प्राप्त हुई। सेबी का मुख्यालय मुंबई में बांद्रा कुर्ला परिसर के व्यावसायिक जिले में हैं और क्रमश: नई दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई और अहमदाबाद में उत्तरी, पूर्वी, दक्षिणी व पश्चिमी क्षेत्रीय कार्यालय हैं।",
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"id": "wiki_म्यूचुअल_फंड",
"source": "wikipedia_hi",
"text": "म्यूचुअल फंड(अंग्रेज़ी:Mutual fund) जिसे हिन्दी में पारस्परिक निधि कहते हैं, किन्तु इसका अंग्रेज़ी नाम अधिक प्रचलित है, म्यूचुअल फंड एक प्रकार का एक सामूहिक निवेश होता है। निवेशकों के समूह मिल कर स्टॉक, अल्प अविधि के निवेश या अन्य प्रतिभूतियों (सेक्यूरीटीज) मे निवेश करते है।। यूटीआई एएमसी भारत की सबसे पुरानी म्यूचुअल फंड कंपनी है। म्यूचुअल फंड मे एक फंड प्रबंधक होता है जो फंड के निवेशों को निर्धारित करता है और लाभ और हानि का हिसाब रखता है। इस प्रकार हुए फायदे-नुकसान को निवेशको मे बाँट दिया जाता है। स्टॉक बाजार की पर्याप्त जानकारी न होने पर भी निवेश की इच्छा रखने वालों के लिए एक सुलभ मार्ग म्यूचुअल फंड होता है। म्यूचुअल फंड संचालक (कंपनी) सभी निवेशकों के निवेश राशि को लेकर इकट्ठे करती है और उनसे कुछ सुविधा शुल्क भी लेती है। फिर इस राशि को उनके लिए बाजार में निवेश करती है। इनमें में निवेश करने का फायदा यह है कि निवेशक को इस बात की चिंता करने की जरूरत नहीं होती कि आप कब शेयर खरीदें या बेचें, क्योंकि यह चिंता फंड मैनेजर की होती है। वही निवेशक के निवेश का रखरखाव करने वाला होता है। एक दूसरा लाभ ये भी होता है, कि छोटे निवेशक बहुत कम राशि जैसे १०० रु.प्रतिमाह तक निवेश कर सकते हैं। ऐसे में उन्हें सिस्टेमेटिक इनवेस्टमेंट प्लान लेना होता है, जिसमें बैंक से ये राशि मासिक सीधे फंड में स्थानांतरित होती रहती है।",
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"text": "शेयर बाज़ार एक ऐसा बाज़ार है जहाँ कंपनियों के शेयर खरीदे-बेचे जा सकते हैं। किसी भी दूसरे बाज़ार की तरह शेयर बाज़ार में भी खरीदने और बेचने वाले एक-दूसरे से मिलते हैं और मोल-भाव कर के सौदे पक्के करते हैं। पहले शेयरों की खरीद-बिक्री मौखिक बोलियों से होती थी और खरीदने-बेचने वाले मुंहजबानी ही सौदे किया करते थे। लेकिन अब यह सारा लेन-देन स्टॉक एक्सचेंज के नेटवर्क से जुड़े कंप्यूटरों के जरिये होता है। इंटरनेट पर भी यह सुविधा मिलती है। आज स्थिति है कि खरीदने-बेचने वाले एक-दूसरे को जान भी नहीं पाते।",
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"id": "wiki_बीमा",
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"text": "बीमा (इंश्योरेंस) उस साधन को कहते हैं जिसके द्वारा कुछ शुल्क देकर हानि का जोखिम दूसरे पक्ष पर डाला जा सकता है। जिस पक्ष का जोखिम बीमाकर पर डाला जाता है उसे 'बीमाकृत' कहते हैं। बीमाकार आमतौर पर एक कंपनी होती है जो बीमाकृत के हानि या क्षति को बांटने को तैयार रहती है और ऐसा करने में वह समर्थ होती है।",
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"id": "wiki_बैंकिंग",
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"text": "बैंक उस वित्तीय संस्था को कहते हैं जो जनता से धनराशि जमा करने तथा जनता को ऋण देने का काम करता है। लोग अपनी अपनी बचत राशि को सुरक्षा की दृष्टि से अथवा ब्याज कमाने हेतु इन संस्थाओं में धनराशि जमा करते और आवश्यकतानुसार समय समय पर निकालते रहते हैं। बैंक इस प्रकार जमा से प्राप्त राशि को व्यापारियों एवं व्यवसायियों को ऋण देकर ब्याज कमाते हैं। आर्थिक आयोजन के वर्तमान युग में कृषि, उद्योग एवं व्यापार के विकास के लिए बैंक एवं बैंकिंग व्यवस्था एक अनिवार्य आवश्यकता मानी जाती है।",
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"id": "wiki_मुद्रा_स्फीति",
"source": "wikipedia_hi",
"text": "मुद्रास्फीति (inflation) या महंगाई किसी अर्थव्यवस्था में समय के साथ विभिन्न माल और सेवाओं की कीमतों (मूल्यों) में होने वाली एक सामान्य बढ़ौतरी को कहा जाता है। जब सामान्य मूल्य बढ़ते हैं, तब मुद्रा की हर ईकाई की क्रय शक्ति में कमी होती है, अर्थात् पैसे की किसी मात्रा से पहले जितनी माल या सेवाओं की मात्रा आती थी, उसमें कमी हो जाती है। मुद्रास्फीति के ऊँचे दर या अतिस्फीति की स्थिति जनता के लिए बहुत हानिकारक होती है और निर्धनता फैलाने का काम करती है। अर्थशास्त्री मानते हैं कि यह बुरी अवस्थाएँ मुद्रा आपूर्ति के अतिशय से उत्पन्न होती है, यानि अर्थव्यवस्था की तुलना में आवश्यकता से अधिक पैसा छापने से ज्न्म लेती है। मुद्रास्फीति का विपरीत अपस्फीति (deflation) होता है, यानि वह स्थिति जिसमें समय के साथ-साथ माल और सेवाओं की कीमतें गिरती हैं।",
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"id": "wiki_प्रधानमंत्री_जन_धन_योजना",
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"text": "प्रधानमंत्री जन धन योजना भारत में वित्तीय समावेशन पर राष्‍ट्रीय मिशन है और जिसका उद्देश्‍य देश भर में सभी परिवारों को बैंकिंग सुविधाएं मुहैया कराना और हर परिवार का बैंक खाता खोलना है। इस योजना की घोषणा 15 अगस्त 2014 को तथा इसका शुभारंभ 28 अगस्त 2014 को भारतीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने किया। इस परियोजना की औपचारिक शुरुआत से पहले प्रधानमंत्री ने सभी बैंको को ई-मेल भेजा जिसमें उन्होंने\t'हर परिवार के लिए बैंक खाता' को एक ‘राष्‍ट्रीय प्राथमिकता’ घोषित किया और सात करोड़ से भी अधिक परिवारों को इस योजना में प्रवेश देने और उनका खाता खोलने के लिए सभी बैंकों को कमर कसने को कहा।योजना के उद्घाटन के दिन ही 1.5 करोड़ बैंक खाते खोले गए।",
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"id": "wiki_निवेश",
"source": "wikipedia_hi",
"text": "निवेश या विनियोग (investment) का सामान्य आशय ऐसे व्ययों से है जो उत्पादन क्षमता में वृद्धि लायें। या अपने पैसों को एक ऐसी जगह डालना जो आपको भविष्य में कुछ रिटर्न कमा कर दें सके, निवेश कहलाता है | यह तात्कालिक उपभोग व्यय या ऐसे व्ययों संबंधित नहीं है जो उत्पादन के दौरान समाप्त हो जाए। निवेश शब्द का कई मिलते जुलते अर्थों में अर्थशास्त्र, वित्त तथा व्यापार-प्रबन्धन आदि क्षेत्रों में प्रयोग किया जाता है। यह पद बचत करने और उपभोग में कटौती या देरी के संदर्भ में प्रयुक्त होता है। निवेश के उदाहरण हैं- किसी बैंक में पूंजी जमा करना, या परिसंपत्ति खरीदने जैसे कार्य जो भविष्य में लाभ पाने की दृष्टि से किये जाते हैं। सामान्यतः इसे किसी वर्ष में पूँजी स्टॉक में होने वाली वृद्धि i",
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"id": "wiki_वित्तीय_साक्षरता",
"source": "wikipedia_hi",
"text": "वित्तीय साक्षरता का अर्थ है - धन के सही ढंग से उपयोग को समझने की क्षमता'। दूसरे शब्दों में इसका मतलब किसी व्यक्ति में मौजूद कुछ कौशलों तथा ज्ञान से है जिनके बल पर वह सोचसमझकर प्रभावशाली निर्णय ले पाता है। विभिन्न देशों में वित्तीय साक्षरता की स्थिति अलग-अलग है।",
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